फिल्म रिव्यू: एक अनोखी प्रेम कहानी है ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’

सिनेमा: एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

सिनेमा प्रकार – प्रेम कहानी, ड्रामा

कलाकार – राजकुमार राव, अनिल कपूर, सोनम कपूर, जूही चावला, रेजिना कैसेंड्रा

निर्देशक – शैली चोपड़ा

अवधि – 2 घंटे 1 मिनट

प्रस्तावना

फिल्म मेकर विधु विनोद चोप्रा अक्सर अनोखे विषय पर फ़िल्में बनाते हैं। उसी तरह से एक और हटके फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ लेकर वो हाज़िर हैं। बेहतरीन अदाकारों का साथ है और नए निर्देशक का जोश भी है। पर क्या यह सब मिलकर आपका मनोरंजन कर पाएंगे या नहीं ? आइये जानते हैं।

कहानी

दिल्ली के फ्लॉप प्ले राइटर साहिल मिर्ज़ा (राजकुमार राव) को पहली नज़र में ही स्वीटी (सोनम कपूर) से प्यार हो जाता है। साहिल को लगता है स्वीटी के कारण उसकी ज़िंदगी निखर जाएगी। जब साहिल को पता चलता है कि स्वीटी पंजाब के मोगा के मुकेश अंबानी यानी बलबीर चौधरी (अनिल कपूर) की लड़की है, तो वो अपनी असिस्टेंट छत्रो (जूही चावला) के साथ स्वीटी की तलाश पर निकल पड़ता है।

दूसरी ओर स्वीटी के घरवालों को पता चलता है कि स्वीटी मुसलमान लड़के से प्यार करती है। इसी कारण स्वीटी के घरवाले उसकी जल्द से जल्द शादी कराना चाहते हैं। इसी बीच साहिल कई तरह के जुगाड़ करके स्वीटी तक पहुँचता है। लेकिन स्वीटी से बात करके साहिल को बड़ा झटका लगता है।

साहिल स्वीटी की खातिर एक तरकीब बनाता है। स्वीटी साहिल को क्या बताती है और साहिल अपनी तरकीब में कामयाब हो पाता है या नहीं यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

फिल्म में सोनम कपूर सबसे अहम भूमिका में हैं। उन्होंने अच्छा प्रयास किया है लेकिन उनकी अदाकारी में कमजोरियां नज़र आती हैं। राजकुमार राव ने ऐसे किरदार पहले भी निभाए हैं। तो उन्हें देखकर कुछ नया नहीं लगता (जैसे की उनसे अपेक्षा है)। अनिल कपूर और जूही चावला की जोड़ी सबसे आकर्षक और मनोरंजक लगती है। रेजिना कैसेंड्रा सोनम कपूर से बेहतर लगती हैं।

निर्देशन

बतौर निर्देशक शेली चोप्रा धर की यह पहली फिल्म है। एक चुनौती भरे विषय को उन्होंने बेहतर ढंग से परोसा है। उनका निर्देशन तारीफ़ के काबिल है।

ख़ास बातें

1 फिल्म के विषय में नयापन है।

2 अनिल कपूर जूही चावला की अदाकारी और केमिस्ट्री।

3 अनोखा संदेश दिया गया है।

कमज़ोर कड़ियाँ

1 पहला हिस्सा बहुत धीमा है।

2 सोनम कपूर की अदाकारी।
3 संगीत और बेहतर हो सकता था।

4 पूरा परिवार साथ देखना पसंद नहीं कर सकता।

देखें या ना देखें

यह फिल्म मेट्रो सिटी के लोगों को पसंद आ सकती है। एक अलग तरह के विषय पर फिल्म बनी है। ऊपर बताए मुद्दों के अनुसार आप स्वयं निर्णय लें आपको यह फिल्म देखनी है या नहीं।

रेटिंग – 2.5/5