फिल्म समीक्षा : जितना डराती है उतना हंसाती भी है यह ‘स्त्री’

सिनेमा – स्त्री

सिनेमा प्रकार – हॉरर कॉमेडी

कलाकार – राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी

निर्देशक – अमर कौशिक

अवधी – 2 घंटे 7 मिनट

प्रस्तावना

राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर की हॉरर कॉमेडी फिल्म स्त्री अपने विषय के कारण दर्शकों के उत्साह का केंद्र बनी हुई है। फिल्म का ट्रेलर भी अच्छा था। प्रमोशन भी अच्छे पैमाने पर हुआ। पर क्या वाकई स्त्री आपको डरा या हंसा पाएगी ? आइये इस सवाल का जवाब विस्तार से जानते हैं।

कहानी

चंदेरी गाँव से कहानी की शुरुआत होती है। गाँव के हर एक घर की दिवार पर लिखा है ‘ओ स्त्री कल आना’। गाँव वालों का मानना है कि हर साल पूजा के अवसर पर यहां स्त्री आती है और पुरुषों को उठा ले जाती है। विकी (राजकुमार राव) गाँव का सबसे मशहूर लेडीज़ टेलर है। उसके दो दोस्त हैं एक बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) दूसरा जना (अभिषेक बनर्जी)। विकी की दोस्ती एक खूबसूरत लड़की (श्रद्धा कपूर) से होती है। जिसके आने के बाद गांव से मर्द गायब होने का सिलसिला शुरू हो जाता है। विकी के दोस्तों को शक होता है वही स्त्री है।विकी अपने दोस्तों समेत स्त्री का पता लगाने में जुट जाता है। स्त्री पर संशोधन कर रहे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) भी विकी और उसके दोस्तों का साथ देते हैं। कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती है उतना ही पेचीदा होती जाती है। जो जितना डराती है उतना हंसाती भी है। तो आख़िर स्त्री है कौन ? वो मर्दों को दर्द क्यों दे रही है? क्या विकी और उसके दोस्त स्त्री का खात्मा कर पाते हैं या नहीं ? इस सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

राजकुमार राव फिल्म की सबसे मज़बूत कड़ी हैं। विकी का किरदार उन्होंने निभाया है। अदाकारी में वो क्तिने मंझे हुए हैं इस बात सबूत उन्होंने स्त्री में दिया है। उनकी जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। श्रद्धा बहुत प्यारी लगी हैं। बहुत अच्छी अदाकारी उन्होंने की है।पंकज त्रिपाठी हमेशा की तरह अपने संवाद की छाप दर्शकों के ज़हन पर छोड़ जाते हैं। अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी ने अपनी भूमिका को दमदार बना दिया है।

निर्देशन और छायांकन

अमर कौशिक ने स्त्री के ज़रिये निर्देशन की शुरुआत की है। लेकिन यकीन मानिए ऐसा कहीं भी नहीं लगता यह उनकी पहली फिल्म है। हॉरर के साथ कॉमेडी का संतुलन उन्होंने बनाए रखा है। राज निदिमोरू और कृष्णा डीके ने फिल्म के छायांकन की बागडोर संभाली है। जो काबिले तारीफ है।

संगीत

सचिन-जिगर का संगीत है जो शानदार है। कमरिया, मिलेगी मिलेगी, आओ कभी हवेली पर जैसे गाने पहले ही हिट हो चुके हैं। केतन सोढा का बैकग्राउंड स्कोर लाजवाब है।

ख़ास बातें

1 कहानी नई, शानदार और अनोखी है।

2 खूब डराती और जमकर हंसाती है।

3 मनोरंजन से भरपूर है।

4 अच्छा संदेश भी दिया है।

5 पूरे परिवार के साथ आप यह फिल्म देख सकते हैं।

कमज़ोर कड़ियाँ

1 हॉरर फ़िल्मों के शौकीन उतना ज़्यादा प्रभावित नहीं हो पाएंगे।

2 अंधविश्वास को कहीं ना कहीं बढ़ावा मिलता है।

देखें ना देखें

स्त्री जितना डराती है उतना हंसाती भी है। साथ ही आपका भरपूर मनोरंजन भी करती है। आप इस फिल्म का आनंद अपने पूरे परिवार के साथ ले सकते हैं।

रेटिंग – 4/5